पाली और प्राकृत शास्त्रीय भाषा घोषित।

दिनाँक 03/10/2024 को संघीय कबीना ने भारत की प्राचीनतम भाषा प्राकृत और पालि की शास्त्रीय दर्जा प्रदान किया है ।

शास्त्रीय दर्जा मिलने से शिलालेखी भाषाओं का विकास होगा। नये संस्थान स्थापित होंगे।

“धम्मलिपि डिक्शनरी “ वर्ष 2024 के शुरुआत में प्रकाशित किया गया था। विश्व की इस यूनिक शब्दकोश को धम्मलिपि प्रवर्तन के लिए समर्पित किया गया था और पुस्तक प्रकाशन के कुछेक माह बाद ही प्राकृत -पाली को भारत की शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलना हर्ष का विषय है ।